सत्ता आती है और जाती है
लोकतंत्र में नया अध्याय जोड़ जाती है
जब सत्ता आती है तो नेता नहीं फुले समाते हैं
जब सत्ता जाती है तो 5 वर्ष तक छटपटाती है
जनता भी क्या चीज है
चाहे तो फलक पर बिठा दिया
अगर धोखा देते तो रसातल पहुंचा दिया
सत्ता आती है ........
एक जमाना था
जब नेता अपना बलि देकर देश के बढ़ाते थे मान
अब वह जमाना गया वह वक्त गया
जनता का खून चूस कर
नेता बढ़ाता अपना अभिमान
सत्ता आती है ........
जब नेता सत्ता पर आसीन होकर
जनता के लिए कुछ नहीं करते
जनता भी 5 साल के बाद
नेता को रसातल भेज देते
सत्तासीन अगर वादे के अनुसार
अपने जी भर करता काम
तो हर घर उनका चर्चा और होता नाम
जो ऐसा नहीं करते
वह 5 साल बाद
घर में बैठकर करता राम-राम
सत्ता आती है और जाती है
कभी खुशी कभी गम दे जाती है
सत्ता आती है .........
शुक्रवार, 5 जनवरी 2018
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