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मंगलवार, 25 फ़रवरी 2025

फ़रवरी 25, 2025

मेरे बिना तुम

तुम्हारी हंसी बता रही है कि तुम मेरे बिना खुश रह सकती है। मेरे सामने तुम जरूर ही नाखुशी का दिखावा करती है।। यह तो दुनिया का रीत ही है इसमें तुम क्या कर सकती है। मेरा क्या है हम तो परदेसी हैं इसमें तुम क्या कर सकती हैं।। मेरे बिना सबके सामने हंसना बोलना बहुत कुछ सिखाती है। मैं तुम्हारे जीवन में नहीं भी रहे जीवन खुशी से जी सकती है।। मुझसे बात बात में रोना पीछे में खुशी से जिंदगी जीना बताती है। सच तो यह है जिंदगी में इस तरह से जीना खूबसूरती कहलाती है।। कभी भी यह नहीं सोचना मेरे बिना मेरी जान खुश नहीं रह सकती है। यह दुनिया बड़ी है खुशी देने के लिए मेरे बिना भी खुशी-खुशी रह सकती है।। तरुण,तरुणी में रोना क्या खुशी से जिंदगी बितानी है। तनावमुक्त जीना ही असली जिंदगानी कहलाती है।।

रविवार, 16 फ़रवरी 2025

फ़रवरी 16, 2025

प्यार तो प्यार होता है।

इस कविता में आपको सभी तरह के पहलू नजर आयेंगे एक बार जरूर पढ़ें 👇 प्यार तो प्यार होता है कुछ दिनों का बुखार होता है। नया नया खूब अच्छा लगता है बात बात में दिवस रैन बीतता है। क्या खाया,क्या पीया हर लब्ज होता है। बिना हाल चाल पूछे कोई नहीं बात होता है। इस कदर डूबा होता है। दुनिया से बेखबर होता है। मैसेज,फोन का इंतजार होता है मिलने को जिया बेकरार होता है। नववर्ष पर नया नया उपहार होता है। साथ में सेल्फी लेने का इंतजार होता है। जब हो जाये छह महीने साल। आने लगता दुनिया का ख्याल। कम हो जाता पूछ्ना हाल-चाल एक दुसरे पर उठाने लगता सवाल। बस इतना ही दिन का होता प्यार होश आने पर उतर जाता बुखार। सच ही कहा प्यार तो प्यार होता है। लेकिन कुछ दिनों का यार होता है।। कवि-तरुण यादव रघुनियां

सोमवार, 6 जून 2022

जून 06, 2022

पुर्णिया की बात पुरानी नहीं -कविता

पुर्णिया की बात पुरानी नहीं जानी पहचानी हो गई
अब अपनी शुरु एक नयी कहानी हो गई।।
पुरानी बात को भूलकर नई जिंदगानी हो गई।
मैं अब स्वीकार करता हूं तू मेरी दीवानी हो गई।।
वादा करता हूं तुझे नहीं छोड़ेंगे
तुझसे मुंह न कभी मुंह मोड़ेंगे
सचमुच में तू मेरी दिलजानी हो गई।
तेरी मेरी शुरू एक नयी जिंदगानी हो गई।।
तुमसा कोई मिली नहीं, बेकार की परेशानी हो गई।
पुरानी बात को छोड़ो, किस्सा पुरानी हो गई।।
ना किसी का हुआ,ना किसी की है अब तुम भी मान गई।
बस कुछ दिन इंतजार कर
रिश्ता खानदानी हो जायेगी।।

शनिवार, 22 जनवरी 2022

जनवरी 22, 2022

दिल की आह -कविता

सोच सोच कर दिमाग खराब है
 लगता भगवान को यही स्वीकार हैं।।

सोच सोच कर बहुत रास्ता को छोड़ा
बच बच कर कितनों से मुंह को मोरा
अब तो चारों ओर से गिरफ्तार हैं
लगता मेरा सारा बुद्धि बेकार है।।

हंस हंस कर कितनों को टाला
सोचता था अपने को हिम्मतवाला
अब बात दिल और दिमाग से बहार है
क्या कहूं खुद कुछ कहने से लाचार हैं।।
~तरूण यादव रघुनियां
जनवरी 22, 2022

दिल का हाल

दुनिया का ये क्या दौर हैं
समझ लेता कुछ ही और हैं।।

कुछ देर के हंसी मजाक को समझ लेता प्यार है
जबकि खुद दोनों को ये बात नहीं स्वीकार हैं।।

दोनों के बिना रजामंदी से बंधन जोड़ते हैं
पता नहीं बीच में कितनो का दिल तोड़ते हैं।।

सोच सोच कर यार बहुत ही परेशान हैं
अब तो खाना पीना भी लगता हराम है।।
~तरूण यादव रघुनियां

जनवरी 22, 2022

दिल का दर्द

बात से अनजान था नहीं परेशान था
मेरा जिंदगी तो शानदार आसान था।।


 जबसे बात को जाना हूं उसको माना हूं
 अब दिन और रात का चैन खो गया
 पता नहीं यह मुझे क्या हो गया।।


 चारों ओर झूठी बात का शोर है
 उसी पर जोड़ है
 पता नहीं अब इसका क्या निचोड़ है।।


 सोच सोच कर घबरा रहा हूं 
क्या कहूं दर्द बता रहा हूं
 सच तो छुप गया झूठ की परछाई में
 हम तो घुंट घुंट मर रहा हूं रजाई में।।
~तरूण यादव रघुनियां

रविवार, 5 सितंबर 2021

सितंबर 05, 2021

नसीब में नहीं तू

क्या दुनिया क्या पुर्णिया सब व्यर्थ है।
तू नहीं तो जिंदगी का क्या ही अर्थ है।।

भूल जाओ जो था सब सपना था।
गुजरा वक्त सच में नहीं अपना था।।

वादे,इरादे, हंसने वाली बातें सब टूट गया।
जब मेरा मुकद्दर ही मुझसे रूठ गया।।

नसीब  के आगे किसका चलता है।
यहां सब उनका जिंदा कठपुतला है।।

जो पहले का दौर था वैसे नहीं चलना।
खुश रहो, आबाद रहो, हंसते ही रहना।।
~तरूण यादव रघुनियां

मंगलवार, 17 अगस्त 2021

अगस्त 17, 2021

सुन्दर रूप में सुराख होता है

सुंदर रूप में सुराख होता है 
मान मर्यादा सब ख़ाक होता है।
 गर विश्वास करो तो पश्चाताप होता है
 और पूछता है क्या यही पाप होता है।।

 रूप दिखाकर क्या इंसाफ होता है
बदन दिखाना ही क्या नाप होता है
 यही रंग समाज का अभिशाप होता है
 पूछते हो दिखाने में भी पाप होता है।।

 आंख का का कुसूर क्या अपने आप होता है
 जब मन नहीं अपने पास होता है 
झूठ ही कहते हैं कुछ और बात है
उसका जिम्मेदार तो खुद अपने आप होता है।।
~तरूण यादव रघुनियां

गुरुवार, 5 अगस्त 2021

अगस्त 05, 2021

खत्म कहानी हो गई

पूर्णिया की बात पुरानी हो गई
अब समझो खत्म कहानी हो गई
अपनी तो शुरू नई जिंदगानी हो गई
ये बता तुझे क्यों परेशानी हो गई।।1।।

तेरी मेरी कहानी पुरानी हो गई
फरेबी सोच पानी पानी हो गई
दिखने में तुम बुढी नानी हो गई
सुनकर बड़ी परेशानी हो गई।।2।।

मुसझे बड़ी नादानी हो गई
सोच कर आंखों में पानी हो गई
सच में तू लाखों की जानी हो गई
तेरी सोच बिल्कुल खानदानी हो गई।।3।।

मेरा सोच इंसानी हो गई
हां लाखों मेरा दिवानी हो गई
तेरी मेरी बात ना कर तू
तेरी मेरी कहानी पुरानी हो गई।।4।।
~तरूण यादव रघुनियां

अगस्त 05, 2021

खत्म कहानी हो गई

पूर्णिया की बात पुरानी हो गई
अब समझो खत्म कहानी हो गई
अपनी तो शुरू नई जिंदगानी हो गई
ये बता तुझे क्यों परेशानी हो गई।।1।।

तेरी मेरी कहानी पुरानी हो गई
फरेबी सोच पानी पानी हो गई
दिखने में तुम बुढी नानी हो गई
सुनकर बड़ी परेशानी हो गई।।2।।

मुसझे बड़ी नादानी हो गई
सोच कर आंखों में पानी हो गई
सच में तू लाखों की जानी हो गई
तेरी सोच बिल्कुल खानदानी हो गई।।3।।

मेरा सोच इंसानी हो गई
हां लाखों मेरा दिवानी हो गई
तेरी मेरी बात ना कर तू
तेरी मेरी कहानी पुरानी हो गई।।4।।
~तरूण यादव रघुनियां

शनिवार, 19 जून 2021

जून 19, 2021

रूप रंग का मारा हूं

रूप रंग का मारा हूं 
दिखने में आवारा हूं
 और क्या क्या कहूं
 अभी तक कुंवारा हूं।।

 किसी ने हुस्न दिखाकर लूटा 
किसी ने बीच सड़क पर कूटा
 किसे कहूं अपना दुखड़ा
 मेरा भाग्य कर्म  है  फूटा।।

तेरे महफ़िल में आया हूं
कुछ सुनाने मैं आया हूं
सोच समझ कर करना प्यार
नहीं तो जिंदगी होगा बेकार।।
© तरूण यादव रघुनियां



शुक्रवार, 14 मई 2021

मई 14, 2021

रात आधी बात सधी

रात आधी बात सधी
 किसको अपना तन्हा हाल सुनाए
 मेरा तो ऐसा ही उमरीया बीता जाए।।

 समय की मार से
 सब करें अपनी संभाल
 कौन सुने इस घड़ी में 
सब तो कर रहा पुकार।।

काल की चपेट से कोई नहीं बचेगा 
चाहे गरीब हो या अमीर
 लाख चतुराई कर ले मनवा 
नहीं उसके आगे कोई वीर।।

 प्रभु के भक्ति में लीन होकर
 कुछ अपने मन को मोर
 क्या पता कब हो जाए 
जिंदगी में इंजोर ।।

लगाते जा लगाते जा अपने मन पर जोर
 एक दिन जरूर सुनेंगे प्रभु मोर।।
~तरूण यादव रघुनियां,मधेपुरा, बिहार

शनिवार, 8 मई 2021

मई 08, 2021

मत करना अभिमान

क्या बुड्ढे क्या नौजवान
 इस महामारी में मिट गया सबका स्थान
घर में एकांत में बैठकर
 सब कहते हे भगवान हे भगवान।।1।।

क्या गरीब क्या है धनवान
  मत करना तू अभिमान 
अभिमान सबका टूट गया
 सब कहता हे भगवान हे भगवान।।2।।

 बहुत घूम घूम कर देता था ज्ञान
 अब बताओ क्या है पहचान 
समय का तकाजा देखो
सब कहते हे भगवान हे भगवान।।3।।

इस समय गरीब,मजलूम का मदद करो
जिसका आक्सीजन बिना छूट रहा प्राण
इस दुःख में जमीर नहीं जागा तो
कभी नहीं माफ करेंगे भगवान
फिर तुम रटते रहना हे भगवान हे भगवान।।4।।
~तरूण यादव रघुनियां,मधेपुरा, बिहार


सोमवार, 26 अप्रैल 2021

अप्रैल 26, 2021

रुपया हैं तो सब अपना हैं

रुपया हैं तो दुनिया है
रुपया खत्म रिश्ता खत्म।।
रूपया हैं तो सब अपना हैं
रुपया नहीं तो सब सपना है।।
रुपया हैं तो पद और पदवी हैं
रुपया बिना इज्जत भी गिरवी हैं।।

रूपया हैं तो मान सम्मान है
रुपया बिना खुद नहीं पहचान है।।

रूपया हैं तो बहुरुपिया है
रुपया बिना घर भी खुफिया है।।

रुपया हैं तो बहुत दोस्त यार हैं
रुपया बिना कहता ये गंवार हैं।।

रूपया हैं तो सब मानता है
रुपया बिना बीबी का कहां सुनता है।।

रुपया हैं तो सारा जहान है
दुनिया कहता बहुत महान है।।
~तरुण यादव रघुनियां,मधेपुरा, बिहार

बुधवार, 21 अप्रैल 2021

अप्रैल 21, 2021

पुरुषोत्तम श्रीराम

प्रभु श्री राम ने अपना उत्तम कर्म अपनाएं 
और जग में भगवान पुरुषोत्तम कहलाए।।


 माता पिता के आदेश को स्वीकार किए 
और वन गमन के लिए सहर्ष प्रस्थान किए।।


भाई भाई में कैसा रिश्ता हो यह बता दिए
 14 बरस एक खड़ाओ से राज चला लिए।।

प्रजा की भलाई के लिए अर्धांगिनी को निकाल दिए सबके लिए एक न्याय हो एक ऐसा प्रमाण पेश किए।।


 पुत्र  आज्ञाकारी हो यह सिद्ध कर दिखला दिए माता-पिता को कोई दुख ना हो हर कष्ट‌ अंगीकार किए।।

 पति पत्नी कैसा कैसा रिश्ता 14 बरस का साथ चले राजमहल का सुख छोड़कर बनवासी का वेश स्वीकार किये।।

हे राम चरित तेरा पावन हैं सबने स्वीकार किये
जीवन दर्शन का कला जन जन पहुंचा दिये।।

दुष्ट रावण के घर जाकर उनका संघार किए
 अंधकार और प्रकाश का शंखनाद किए ।।

अज्ञान पर ज्ञान का एक संदेश दिए 
सभी के मन के मलिन को दूर किये।।

👉सभी को रामनवमी पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं
~© तरूण यादव रघुनियां

सोमवार, 19 अप्रैल 2021

अप्रैल 19, 2021

कौन सुनते है

जीवन के लिए नहीं कोरोना का डर
कमाने के लिए कर रहे बस से सफर
मेरे मरने या जीने का क्या कीमत
जब मेरे शाशनाधीस ही बेखबर।।1।।

जब मर्जी बंद,जब मर्जी खोल देते हैं
चुनाव में खुलेआम रोड सो करते हैं
हमें महामारी का हवाला देकर
 पुलिस प्रशासन खूब धुनते हैं।।2।।

रोजगार का हवाला देकर घर बुलाते हैं
कोई काम मांगने जाओ धक्का देते हैं
घर में खाने पीने का कोई समान नहीं
पत्नी भी रुपया के लिए गाली देती हैं।।3।।

नेता और बीबी में अद्भुत समानता है
एक धक्का देते हैं तो एक गाली देती हैं
दोनों में किसी को कितना भी कह दो
वो मेरे एक भी बात कहां सुनते हैं।।4।।
~© तरूण यादव रघुनियां, मधेपुरा











शनिवार, 17 अप्रैल 2021

अप्रैल 17, 2021

लड़का ऐसा चाहिए

लड़का ऐसा चाहिए
देखने में गोड़ा हो
कोई काम नहीं छिछोरा हो
दिखने में हैण्डसम छोरा हो।
कुछ नखरें सहनी चाहिए।।1।।

लड़का ऐसा चाहिए
मेरी क्यों न अठाइस हो
उम्र उनका बाइस हो
मेरी जैसी अजमाइस हो
नाक लंबा होना चाहिए।।2।।

लड़का ऐसा चाहिए
सरकारी वाला जाॅब हो
मेरी सहने वाला राव हो
घर में बूढ़ी मां नहीं चाहिए।।3।।

मैं देखने में कैसी हूं
चाहे क्यों न चुड़ैल जैसी हूं
लेकिन एकदम लड़का सुपर हो
दिखने में चांद से ऊपर हो
लड़का ऐसा चाहिए।।4।।

लड़का ऐसा चाहिए
बहुत पैसा वाला हो
शहर का जिगर वाला हो
घर में लगी मोटर कार हो
मकान के चारों ओर चारदीवार हो।।5।।

देखने में क्यों न गैंडी जैसी मोटी हूं
कद काठी में बिल्ली जैसी छोटी हूं।
घर में सबसे बड़ी मां जैसी लगती हूं
लेकिन मुझे कच्चा उम्र वाला चाहिए
लड़का ऐसा चाहिए।।6।।

लड़का ऐसा चाहिए
जो मुझे हीरोइन कहती हो
मेरी होंठ, मुंह में नहीं चार्मिंग हो
लेकिन हर लब्ज डार्लिंग कहती हो।।7।।
हां मम्मी मुझे ऐसा लड़का चाहिए.....
~© तरूण कुमार, मधेपुरा बिहार








रविवार, 11 अप्रैल 2021

अप्रैल 11, 2021

सपना चकनाचूर हुए

लाचारी और बेबसी ने  सपना चूर किये
कितनों ने हार मान ली कितने तो मरने मजबूर हुए।।


सपना को सोच सोच कर अपनों से दूर हुए
समाज से कटकर तन्हा में जीना स्वीकार किये।।

नेप्टोनिज्म के आग ने कितने घर जला दिए
गरीब मां, बहन की कोख को पल भर में सूना कर दिए।।


समानता की बात करते करते सदियों बीत गए
कितनों के घर चूल्हा नहीं जल रहा कितना आगे बढ़ गए।।

उंच नीच का जाति पांति घर घर में जहर घोल दिए
आज भी forward, backward की बात घर में बच्चों को सिखा रहे।।
तरूण लानत है ऐसे समाज को जो आज भी पुरानी ख्यालात में जी रहे
आगे बढ़ने वाले का सरेआम टांगें खींच रहे।।
~© तरूण यादव रघुनियां मधेपुरा, बिहार

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शुक्रवार, 9 अप्रैल 2021

अप्रैल 09, 2021

शब्द शब्द पर भारी है

शब्द शब्द पर भारी है 
कल तुम्हारा तो आज हमारा बाड़ी है
कौन बड़ा कौन छोटा
 सब तो एक खिलाड़ी है।।1।।

सब तुम्हारा दिल से आभारी है
 निजी है यह नहीं सरकारी है 
कौन कहता है दुआ काम नहीं आता
 यह कैसी सचमुच में खातिरदारी है।।2।।

टूटी सड़क सरकारी है
 सब इसका आभारी हैं 
एक्सीडेंट तो बहुत हो रहा 
 यह किसकी जिम्मेदारी है।।3।।

गांव गांव में विद्यालय और पुस्तकालय नहीं
 अनाथालय बनाने की तैयारी है 
यह कैसी दया का काम कर रहे 
सब बेटा बहू सरकार का आभारी है।।4।।
~तरूण यादव रघुनियां,मधेपुरा, बिहार
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सोमवार, 5 अप्रैल 2021

अप्रैल 05, 2021

मेरा दिल जानता है

यहां कौन किसे अपना मानता है
 यह तो मेरा दिल ही जानता है
 सब तो समय का फिरंगी है
 इस रेत में क्या ढूंढता है।। 1।।

बिना काम का कौन पहचानता है
 क्या अजनबी धूर छानता है 
अन्दर कितना दर्द छिपा है
  यह तो सब मेरा दिल जानता है।।2।।

 अपनो के सिवा कौन मानता है
मुफ्त में कौन है हेलो करता है
 सब तो मौके की तलाश में है
 यह तो मेरा दिल जानता है।।3।।

धूर्त देखकर आंख पर पट्टी बांधता है
 दर्द देकर अपना को सुखी मानता है
कितना दर्द सहा हूं इस जालिमों से
 यह तो मेरा दिल जानता है।।4।।
~तरूण यादव रघुनियां मधेपुरा
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“O Romeo” Movie Review & Story Breakdown – A Fresh Romantic Drama for Today’s Audience

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