संसदीय चौक पर मेला देखा
दुष्ट के चेलों का खेला देखा
बात-बात में देश को खाए
जनता के सामने जुबानी चाल चलाई
दीमक की भांति देश को खाए
अपनी करनी पर कभी ना पछताए
अपनी पद का सदा रोटी खाता
दूसरे हक का अपने व काला धन बनाता
अपने-अपने में जुबानी जंग लगाता
सीधे-साधे जनता को उल्लू बनाता
अब जनता उल्लू से युवा हुए
दुष्ट को बिच्छू का डंक दिए
नोट देने के वोट को बीट किए
रसातल में पछताने के सेट किए
जनता जागते जागते अब युवा हुए
जालिम के भाग को कटघरे में कैद किए
यहां की जनता अब युवा हुए
हर क्षेत्र मैदान में कंस को कृष्ण दिए
कंस का भाई ठंढी गर्मी में काला कोट लगाते
कंस मामा बनकर दिन-रात भोले से पैसे ऐंठते
आज के युवाओं को देश के लिए आगे आना होगा जालिम का जालिम रोशन का तेल लगाना होगा
तब हो जाएगा देश का कल्याण
गरीब भाई के जी में आएगा जान।
गुरुवार, 11 जनवरी 2018
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