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मंगलवार, 28 मई 2019

मेरी आहें भाग 3

बचपन में मैं पढ़ने में बहुत तेज था लेकिन शुरू में पढ़ने में डर लगता था क्योंकि उस समय जरूरी था वह आध्यात्मिक क्षेत्र से जुड़ा हुआ था जब पढ़ाई शुरू किया तो कुछ दिन कामचोर अपनी भी किया दूसरों के द्वारा रेटिंग लिखवाना और उसका कोई काम कर देना और इसमें सबसे ज्यादा मैं विकास कुमार से करवाता था उसका पैर दबा देता था और उससे राइटिंग लिखवा लेता था इसी सिलसिले में एक दिन प्रदीप सर ने मुझे कहा यह तुम्हारा लिखा हुआ राइटिंग है तो मैंने कहा नहीं तो उन्होंने कहा कि रोज तुम हम को ठग रहा था कौन लिख दिया तुमको तो मैंने कहा विकास विकास को भी बुलाया और कहा तुम इसको काहे लिख देता है तो इस पर उसने जवाब दिया की मैं इसको लिख नहीं देता हूं यह मेरा खुशामद करता है तब मैं लिख देता हूं उसको तो बैठा दिया लेकिन हमको दो छड़ी मारा और कहा तुमको जैसे होता है वही लिखो स्वावलंबी जीवन जीओ दूसरे पर आश्रित मत रहो और मैंने उस दिन से ठान लिया और उस दिन से अपना जैसे हो लिखना शुरू कर दिया और जब लिखना शुरू कर दिया सबसे अच्छा सबसे शुद्ध और सबसे सुंदर लिखना शुरू किया बाद में सबको पीछा कर दिया पढ़ाई में भी जब सबको डिक्टेशन लिखाते थे सब हमसे सीनियर क्लास था लेकिन सबसे ज्यादा मेरा सही होता था एक दिन डिक्टेशन लिखाने के क्रम में सर ने फौजी लिखाया और लिखते ते चला गया लिखने के क्रम में मैंने फौजी के जगह भौजी लिख दिया और कॉपी भी जमा कर दिए थे सोचे थे है कि अंतिम में उसको सही कर लेंगे लेकिन सही नहीं पढ़ पाए और कॉपी मैंने जमा कर दिया और मेरा कॉपी सबसे अंतिम में था सबका जब जांच कर रहा था ढेर सारा का गलती हुआ अंत में जब मेरा कॉपी जांच कर रहे थे सर तो लगभग सब सही था सिर्फ एक ही गलती था वह जो फौजी की जगह मैंने भौजी लिख दिया था लड़का देखो ना बेवकूफ को भौजी खोज रहा है फौजी लिखने जगह भौजी लिख दिया है और उसके बाद सर ने बहुत हंसे और सबको हंसी लगा दिए और जब सर को हंसी लग गया तो उसके बाद पिटाई तो सबको लगता और मेरे कारण सब मार से बच गए और सब मुझे चिढाता था फौजी की जगह नहीं भौजी की जगह आज भी मुझको याद है जब वह बात याद आता है तो बहुत हंसी आता है और मेरा शुरू से ही पढ़ाई में अत्यंत रुचि और तेज बुद्धि के कारण मैं रोज नया पहरा बदलता जाता था रोज सुनाते जाता था और इसी क्रम से मेरा बचपन का पढ़ाई आगे बढ़ा और आगे बढ़ता चला गया

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