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मंगलवार, 28 मई 2019

बिहार में जातिवाद खत्म होने की ओर

2019 का चुनाव पूरा असमंजस भरा हुआ था और इस असमंजस में था कि अबकी बार पूरा बिहार गठबंधन के हाथ में होगा यहां तक कि मैं भी कन्फ्यूजन में था कि अबकी बार महागठबंधन बाजी मारेगा या एनडीए लेकिन मन में एक रोज शुरू से ही है कि बिहार में जातिवाद और परिवारवाद का जड़ बहुत गहरा है जो बिहार के हर समाज को हर बड़ों को खोखला कर दिया है और बिहार के विकास की गाड़ी को अवरुद्ध कर दिया है बिहार में ऐसे भी युवा हैं जो चाहते हैं इस क्षेत्र में आने के लिए अपना योगदान देने के लिए लेकिन परिवारवाद जातिवाद के कारण वह दवा ही रह जाता है आगे नहीं बढ़ पाता है अर्थात आगे उसको बढ़ने नहीं दिया जाता है इसके लिए जो जातिवाद को बढ़ावा दे रहे हैं उसको कुचल देते हैं उसके लिए चाहे उसको जो भी हथकंडा अपनाना पड़े वह अपना लेते हैं और इस तरह जातिवाद का बोलबाला आज तक अपने हाथों में थमा हुआ था लेकिन 2019 में उन सब को थमा दिया और जातिवाद और परिवारवाद पर करा चोटिया जबकि परिवारवाद एक तरह से अवसरवादी ता को जन्म देते हैं और खास करके अब गांधी परिवार कांग्रेस परिवार को देख लीजिए तो कुछ ज्यादा बढ़ावा दिए हैं लेकिन यह 2019 एक सबक देकर गया कि अब परिवारवाद का जमाना खत्म जातिवाद का जमाना खत्म विकासवाद की जवाना शुरू जो रोजगार दे विकास की बात करें और संप्रदायिक ताकतों को दबाने की कोशिश करें उसके साथ बिहार अब रहेगा क्योंकि अब अधिकांश सामाजिक परिवेश के लोग भी जागरूक हो चुके हैं शिक्षित हो चुके हैं और सबों ने निर्णय लिया कि इस बार क्यों ना यह जो बना है महागठबंधन जिसे पराया महा हठ बंधन कहा जाता है इस को रोका जाए और देश को नेतृत्व करने के लिए मजबूत इरादे वाले मजबूत कार्य करने वाले दृढ़ इच्छाशक्ति रखने वाले एक योग सरकार दिया जाए उर्स में बिहार के हर वर्ग के हर जाति के हर धर्म के लोग ने निस्वार्थ भाव से जो कदम उठाया वह बहुत ही सराहनीय है और यह एक तरह से उन लोगों को आईना दिखाने के काम करेगा जो कह रहा था कि बिहार में जातिवाद खत्म नहीं होगा परिवारवाद खत्म नहीं होगा तो कम से कम अब बिहार में जातिवाद खत्म होने की ओर ऐसा आप महसूस कर सकते हैं यह 2019 के लोकसभा चुनाव के इलेक्शन के रिजल्ट के बाद अब बात साफ हो गया और बिहार के अधिकांश युवा रोजगार ढूंढ करके अपना घर गिरस्ती बसाने में लग जाते हैं और नेता ऊपर से चाबुक चला कर के रस मलाई खाते रहते हैं और राज का हमेशा से शोषण करते आ रहे हैं जबकि इसके विरोध में युवा को आगे कदम बढ़ाना होगा जब बिहार के हर वर्ग के लोग जातिवाद को खत्म करने की ओर अग्रसर हो गए हैं तो इसमें अधिकांश भूमिका आप को मानना पड़ेगा कि युवा कड़ा क्योंकि युवा अब चाहता है कि बिहार से अच्छा नेतृत्व हो और जातिवादी व्यवस्था को लगाम लगाया जाए विकासवादी व्यवस्था को आगे बढ़ाया जाए और यह हद तक हम सब ने मिलकर किया आगे यह देश के लिए भी प्रेरणा स्त्रोत बनेगा

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