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रविवार, 14 अप्रैल 2019

मृतक का जीवित हो जाना

यह प्रसंग काशी का है एक बूढ़ी ब्राह्मण कि पति मर गए तो उन्होंने सती होने के लिए जो जो वस्तुएं समान होना चाहिए उसको एकत्र कर रही थी और स्नान करने के लिए जा रही थी गंगा तो रास्ते में तुलसीदास जी का कुटी पड़ता था तो वह बूढ़ी ब्राह्मणी सोची क्यों ना अंतिम समय में साधु का चरण छूकर के आशीर्वाद ले करके ही जाए तो सोच कर के आगे बढ़ी स्नान करके लौट रही थी और स्नान करने के बाद जब उसके कुटिया में जाते हैं तो तुलसीदास जी ध्यान अस्त अवस्था में ध्यान करते थे बुढ़ी ब्राह्मणी जाती है और तुलसीदास जी को प्रणाम करती है ध्यान अवस्था में बूढ़ी ब्राह्मणी को आशीर्वाद दिए सुहाग वती भव ब्राह्मणी ने कहीं की साधु महाराज अभिमान अपने पति को लेकर के जाने वाली थी सती होने के लिए आप तो हम को आशीर्वाद दे दिए स भागवती होने के लिए यह तो साधु के वचन का अवहेलना होगा आप ही बताइए क्या कीजिएगा अब तो आपको हमारे पति पर कृपा करना ही होगा इतना सुनते ही तुलसीदास जी की आंखें खुली और जब देखते हैं तो सामने में बूढ़ी सच में सती होने के लिए जा रही थी तो उन्होंने कहा अब तो मुंह से निकल गया चलो तुम्हारे यहां चलते हैं जब बूढी ब्राह्मणी के यहां तुलसीदास जी जाते हैं तो उसके मृत पति के सामने जाकर उसको कहते हैं कि इसके शरीर में लिपट जाओ और श्री सीताराम श्री सीताराम नाम लेकर के उसको बोलो उठने के लिए और वहां के जितने भी ग्रामवासी आए हुए थे सबों से कह दिए की ब्राह्मण और ब्राह्मण को लिफ्टी अवस्था  में कोई नहीं देखे जो देखेगा वह अंधा हो जाएगा इसलिए सब अपना आंख बंद कर ले और श्री सीताराम सीताराम का जाप करें वह बूढ़ी ब्राह्मणी प्रभु पर विश्वास करके प्रभु के नाम पर विश्वास करके अपने पति के शरीर से लिपट गई और प्रभु का नाम लेकर के उठने के लिए कहती है और उसके बाद वहां पर जितने भी थे सब अपने प्रभु का नाम लेकर के उस को जीवित करने के लिए प्रार्थना की और तुलसीदास जीवनी प्रार्थना की और उसके पति जीवित हो गए और इतना ही नहीं जो देख रहे थे जिसकी आंखें खुली थी सच में हुए अंधे भी हो गए तो उन्होंने भी तुलसीदास जी से प्रार्थना की और मेरा भी कष्ट दूर कीजिए उसके बाद उसी दास जी ने प्रभु से प्रार्थना की है उन सब का भी कष्ट दूर हो गया और तुलसीदास जी महाराज का जय जयकार होने लग गया उन्होंने कहा कोई कृपा दया नहीं है यह तो प्रभु श्री राम का कृपा है उस नाम का कृपा है उसको प्रेम के साथ विश्वास का आस्था के साथ करेंगे तो जरूर ही कल्याण होता है और हुआ है और हो रहा है

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