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शनिवार, 13 अप्रैल 2019

पॉलिटिक्स से युवा को गुरेज क्यों?

Yuva Desh Ke कर्णधार होते हैं युवा जिधर चाहता है उधर हवा बहती है जिस ओर चलते हैं उस और हवा के रुख मुड़ जाती है लेकिन फिर भी एक प्रश्न है आखिर क्या कारण है युवा आज भी पॉलिटिक्स में नहीं है इसकी संख्या नगण्य है इसमें उनकी रुचि नहीं है ऐसा क्या विपत्ति है कि पॉलिटिक्स से युवा इंटरेस्ट नहीं रख रहे हैं आपको एक बात जानकर हैरानी होगी कि देश के 65 पर्सेंट आबादी युवा हैं और इतना रहने के बावजूद भी आज उम्र दराज नेता देश को चला रहे हैं देश में वह जोश आना चाहिए वह जोश नहीं आ रहा है ऐसा क्यों क्यों हमारे देश की युवा पीढ़ी सोए हुए हैं क्यों वह नौकर बनने के पीछे भाग रहे हैं क्यों न वह भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ने के लिए आवाज बुलंद कर रहे हैं क्यों 9 मालिक बनने का प्रयास कर रहे हैं यह सब का एक ही उत्तर है कि बचपन से ही घर में इस तरह से परवरिश किया जाता है कि उसका मानसिकता नौकर बनने का हो जाता है अर्थात नौकरी लेने का मकसद हो जाता है नौकर बनाने का नहीं मालिक बनने का नहीं और इस मानसिकता को आज तक हमारे युवा होते आ रहे हैं कब इस मानसिकता को तोड़कर के नया इतिहास लिखेंगे नया युग की शुरुआत करेंगे आइए हम सब मिलकर के एक नया इतिहास लिखेंगे नया अध्याय जोड़े युवाओं के नाम आज अधिकांश क्षेत्र में चाहे पॉलिटिक्स छोड़ करके कोई भी सा क्षेत्र नहीं है जहां पर युवाओं का सिक्का नहीं चलता है सिक्का नहीं चमकता है तो यह जब उस क्षेत्र में शिक्का  चमक जाता है तो फिर पॉलिटिक्स में सिक्का और जनता की सोच को बदलें जनता के मुराद को पूरा करने का वीरा उठाएं यह देश की राजनीति को जो बूढ़ा बना दिया है संस्था को जो शिथिल बना दिया है उससे छुड़ाएं देश को आगे बढ़ाएं और इसके लिए जो ये क्षुद्र  मानसिकता है उसको छोड़ना पड़ेगा जब तक यह मानसिकता को नहीं छोड़ेंगे और अपना नया अध्याय के लिए नहीं सोचेंगे और अपने जो इसमें एक तरह से मानसिकता बन गया है कि हम नौकरी करें नौकर हो नौकर साह ने और यह नहीं सोचते हैं कि मालिक ही बने आज आपको एक बात पर बड़ी गौर से सोचना पड़ेगा पॉलीटिशियन के जितने भी बच्चे हैं क्या वह नौकर बनते हैं नौकरी लेना चाहते हैं वह अपना अलग क्षेत्र बना लेते हैं अनेकों कॉर्पोरेट जगत में आते हैं और उस ओर चमकते हैं और करोड़ों लाखों में अपना विरासत को बना लेते हैं चमका लेते हैं और उसके पीछे देश के लाखों युवा नौकर बनकर कार्य करते हैं आखिर ऐसा क्या आपत्ति है कि एक उच्च सोच भी हमारे देश के युवा नहीं रख रहे हैं
 केवल पॉलीटिशियन के बच्चे बूढ़े सब घी मलाई खा रहे हैं और आज तक देश के जो गरीब तबके के लोग हैं वह बराबरी तक नहीं आया है जो हमारे देश के संविधान में वर्णित किया गया है समानता और समानता अभी तक नहीं आया है इस सब का एक ही कारण है कि हमारे देश के युवा तो कहते हैं हमें जोश हैं लेकिन सच कहें तो जिस क्षेत्र में यह जोश को लगाना चाहिए उधर ने लगाते हैं और दूसरी ओर लगा कर के अपना होश खो बैठते और इसलिए आज अपने देश का यह हालत है फिर भी जो हुआ सो हुआ अब इस मन संकीर्ण मानसिकता से उठकर के नई इबारत लिखना होगा आगे बढ़ना होगा और नई इतिहास बनाना होगा नया अध्याय जोड़ना होगा इसलिए
" युवाओं को आओ मर्द बनो"
" देश का हमदर्द बनो"

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