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गुरुवार, 30 मई 2019

मेरी आहें भाग 6

जब मैं वर्ग 8 में गया तो टिकुलिया चौक पर सिंकु सर के कोचिंग में पढ़ने गया वहां पर इधर से हम अकेले जाते थे और मैंने पूरा जतन से तैयारी किया और वहां पर जितना भी स्टूडेंट था सबसे आगे निकल गया वहां पर हर सप्ताह टेस्ट में मुझे सबसे अधिक आता था और हर प्रश्न का जवाब मैं फौरन सुना देता था सिर्फ सर के मुंह से क्वेश्चन निकलता मेरा आंसर फौरन निकल जाता था अगर जब रुक जाते तो बोलता ज्यादा नहीं है और ऐसा सिर्फ एक बार हुआ था नहीं तो किसी दिन और किसी माह ऐसा मौका नहीं दिया की क्वेश्चन बोले उसका आंसर मेरे पास नहीं था और इधर कोचिंग करने के बाद मध्य विद्यालय रघुनियां में अपना नियमित रूप से क्लास भी करता था और क्लास में सबसे हमेशा अव्वल रहने के कारण सबके नजर पर रहता था सर मुझे बहुत मानते थे सभी सर मुझे बड़े लाल प्यार करते थे ऐसा देख कर मेरे वर्ग फ्रेंड को जलन होता था और उसमें सबसे ज्यादा संतन कुमार और हो भी क्यों नहीं मेरा मकसद यही था कि अगर जलन होगा तभी तो पढ़ना शुरू करेगा और ऐसा ही किया एक रोज जब मैं सुबह में बच्चे सब को पढ़ा रहा था तो मेरे यहां आया और जहां मैं पढ़ा रहा था वहां कुछ देर बैठा और बोला कि चलो आज से मैं भी तुम्हारे साथ पढ़ने के लिए सिंकु सर के पास जाऊंगा उन्होंने कहा कि तुम पढ़ाते हो कैसे पढ़ा लेते हो मेरे पास तो बच्चा भाग जाता है कोई रुपया नहीं देता है कोई गार्जन मेरा तवज्जो नहीं देता मैं क्या करूं? मैंने कहा कि 👉तुम इसी टाइम रोज मेरे पास आकर बैठा करो और वह नित प्रति जब मैं पढ़ाता था तो आकर बैठ जाता मैं कैसे बढ़ाता हूं उसे देखते रहता फिर मैंने उसको कहा कम से कम एक या दो बच्चा को पढ़ाओ और बच्चा को मन से पढ़ाओ जतन से पढ़ाओ जिससे बच्चा खुश हो जाए और जा कर के अपने गार्जन से कहे कि मैं इसके पास पढ़ूंगा बहुत बढ़िया से पढ़ाता है और अगर बच्चा एक्सेप्ट कर लिया कि पूरा बढ़िया से पढ़ाता है और पढ़ने लग गया और वहीं बच्चा को फिर कहना कि जो अपने गार्जन से बोलना कि रुपया देने के लिए तो तुमको रुपया भी मिलेगा और तुम पढ़ाना भी शुरू करेगा और तुम्हारे पास धीरे धीरे बच्चा बढ़ना शुरू हो जाएगा और उन्होंने ऐसा ही किया और यह मूल मंत्र उसको काम आया और वह आगे बढ़ता चला गया और आज तक पड़ा रहा है" मैं जिस समय पढ़ाता था उस समय मेरे उम्र का मेरे गांव समाज में कोई नहीं पढ़ाता था सब अपने गार्जन के पैसों से से पढ़ा करता था लेकिन मैंने अपने जीवन को तपाया स्वावलंबी बनाया और अपना से खुद पढ़ा करके पढ़ने का जरिया निकाला और दूसरे का प्रेरणास्रोत भी बना और बहुतों को प्रेरित भी देकर के पढ़ाने का काम सिखाया और बहुत तो ऐसा काम कर भी रहे लेकिन किया तो जरूर बाद में अपमान भी किए इल्जाम भी लगाए वह क्या जानता है वह क्या बताएगा उसे ज्यादा हम जानते हैं यही बात हुआ की भलाई करने पर भी आजकल दुत्कार ही मिलता है। और उसका उत्तर तब मिला संतन कुमार के कोचिंग के बगल में कोचिंग खोलने का काम प्रारंभ किया तो उन्होंने गांव-गांव में जाकर के कहने लगा कि यह मेरा साथी मेरा बच्चा काट लेगा क्योंकि वह मुझसे ज्यादा जानता है उन्होंने ही मुझे पढ़ने का आईडिया भी सिखाया था मुझसे पहले से पढ़ाता था वह तो आईएससी वाले को पढ़ाते हैं साइंस वाले को पढ़ाते हैं मुझसे ज्यादा जानता है फिर मेरे बगल में क्यों खोल रहा है मेरा सब बच्चा कट जाएगा उसको बोलिए यहां नहीं खोलने के लिए तो देखिए जब अपने पर पड़ता है तब कोई हकीकत बात उबलता है नहीं तो घमंड में चूर हो जाता है वही हाल संतन कुमार का हुआ जब मैंने उसके बगल में पढ़ाना शुरू किया उसका जितना भी सीनियर बच्चा था जो पढ़ने में थोड़ा तेज था सब भाग भाग कर के मेरे पास आ गया वह वह तब अपने क्लास में कहता था कि जाओ जिसको भागना है भाग जाओ जाओ उसी के पास पढ़ना हम छोटा बच्चा को लेकर ही पड़ा लेंगे तुम बड़ा वाला बच्चा सब उसी के पास चला जाएगा हमको पूरा विश्वास है तुम उसके जाल में फंस जाएगा और तरह तरह का बात बोलने लगे तुम लोग नहीं पढेगा तो क्या मेरा पेट नहीं चलेगा । सिर्फ छोटे बच्चे को ले करके अपना काम कार्य करते रह गया और बाद में मैंने वहां से फिर अपना कोचिंग दूसरे जगह कर लिया सोचा चलो उसको अपना आजीविका चलाने दो मेरा तो और भी काम होगा और भी कार्य करना है और दूसरे के लिए प्रेरणास्रोत बनना है।

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