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शुक्रवार, 31 मई 2019

संसार का धर्म जन्म और मरण है

संत सद्गुरु महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज हमेशा ही अपने भक्तों को उपदेश दिया करते थे यह संसार का धर्म जन्म और मरण है यहां पर जो भी आया है वह 1 दिन जाएगा है इसी के इसी को समझाते हुए एक प्रसंग कहा था काशी में एक बूढ़ी माई के इकलौता पुत्र जो था वह मर गया और वह माई विश्वास नहीं कर रही थी वह यह सोच रही थी कि यह बीमार हुआ है फिर ठीक हो जाएगा गांव के लोग समाज के लोग अपने आस-पड़ोस के लोग सबों ने उस बूढ़ी माई को समझाया देखो तुम्हारा बेटा मर चुका है लेकिन वह बूढ़ी माई को विश्वास था मरता नहीं है यह बीमार हुआ है फिर यह ठीक हो जाएगा यही बात वह सबसे करती और कहती कि कोई उपाय बताओ जिससे मेरे बेटे का बीमारी ठीक हो जाए सबों के यहां जाकर यही बात कहती लोगों को लगा यह अब पागल हो गई है तो उन्होंने कहा कि देखो इसी गांव में एक बड़े प्रसिद्ध महात्मा आए हैं भगवान बुध उसके पास अगर तुम अपने पुत्र को लेकर जाएगी तो वह तुम्हारे पुत्र का जो बीमारी है उसको ठीक कर देंगे वह बूढ़ी माई पूरे विश्वास के साथ भगवान बुध के समीप गए और दंडवत प्रणाम करके बोले कि भगवान मुझे एक ही इकलौता पुत्र है वह कई दिन से बीमार है आप इसका दवाई बता दीजिए जिससे यह ठीक हो जाएगा गांव के लोगों ने कहा है कि इसे सिर्फ आप ही ठीक कर सकते हैं जब भगवान बुद्ध ने देखा तो कहा कि ठीक है माई यह ठीक हो जाएगा लेकिन एक साधारण काम तुमको करना होगा वह बूढ़ी माई ने कहा भगवान आप जो भी कहिए हम सब मानने के लिए तैयार हैं लेकिन आप मेरे पुत्र की बीमारी को ठीक कर दीजिए वह ठीक हो जाएगा हमको ऐसा विश्वास है तो भगवान बुद्ध ने उसको अज्ञानता से बाहर लाने के लिए कहा बूढ़ी माई इस पूरे काशी नगरी में जाओ किसी के यहां से एक मुट्ठी सरसों लेकर के आओ बूढ़ी माई खुशी पूर्वक गांव की तरफ चल दी इतने में भगवान बुद्ध ने पुनः इशारा करते हुए कहते हैं माई लेकिन एक शर्त है शर्त यह है की जिसके यहां से तुम एक मुट्ठी सरसों लेकर आएगी तो उसको लेने के साथ एक बात अवश्य पूछना तब ही लेकर आना कि तुम्हारे यहां अभी तक कोई नहीं मरा है और अगर नहीं मरा है तभी हम को एक मुट्ठी सरसों तो जब काशी में बूढ़ी माई मांगने के लिए गई जिस घर भी जाती उसको तो सरसों एक मुट्ठी दे देते और जैसे ही किसी से पूछते आपके यहां अभी तक कोई नहीं मरे हैं तो लोग सुनकर झुंझला उठते और कहते कि एक ऐसी पगली है किसके यहां ऐसा घर है कि उसके घर में अभी तक कोई नहीं मरा होगा और जब काशीपुरा भ्रमण कर ली सब जगह यही शब्द सुनने के लिए मिला तब उसको पूरा विश्वास हो गया कि मेरा पुत्र जो है वह मर चुका है मैं तो पागल सी हो गई थी मैं तो दूसरे भाव विभोर में डूब गई थी कि यह मेरा बेटा अभी तक बीमार है और उसके बाद भगवान बुध के चरण में आई और उसके चरण पकड़ के बोली भगवान हमको अब वह ज्ञान हो गया है इस संसार में जो आया है सबको जाना पड़ेगा इसलिए आप हमको अब शरण में लीजिए मेरा पुत्र तो मर गया अब हमको पूरा विश्वास हो गया है तो कहने का भाव यह है कि संसार में जो भी आया है सबको एक ना एक दिन जाना पड़ेगा क्योंकि संसार का धर्म ही है जन्म और मरण तो इसके लिए हमको कुछ ऐसा कार्य करके जाना चाहिए जिससे कि लोक और परलोक दोनों संवर जाए क्योंकि एक परदेसी की भांति यहां पर आए हैं और अच्छा कार्य करके और जाएंगे यहां से तो यहां भी नाम होगा और वहां भी नाम होगा

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