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गुरुवार, 12 सितंबर 2019

संत और सत्संग की महिमा

यह कथा विष्णु पुराण की है और एक प्रसंग चल रहा था भगवान विष्णु और नारद जी के बीच नाराजगी भी नारद जी भी एक संत ही थे और उसके मन में संशय उत्पन्न हो गया कि क्या संत और सत्संग की भी महिमा होती है और अपना संशय भगवान विष्णु के सामने प्रकट किया भगवान विष्णु ने कहा नारद जी अच्छा इसका समाधान भी कर देंगे और संयोग की बात है एक दिन नारदजी से कहा की जाइए पृथ्वी लोक पर अभी नदी किनारे एक वृक्ष है वहां पर जो आपको सबसे पहले मिलेंगे आप उनसे संत और सत्संग की महिमा पूछ लीजिएगा और आपका शंका समाधान होगा और नारद जी ने वहां से चले और उस नदी के किनारे जो वृक्ष था वहां पर खड़ा होकर के चारों ओर देखने लगते हैं वहां पर कोई नहीं था लेकिन एक बड़ा बल अकीरा उस पेड़ पर चल रहा था उसकी रा उस कीरा से भगवान नारद जी ने पूछा क्या आप संत और सत्संग की महिमा के विषय में बता सकते हैं और यह बात जैसे ही किरा के कान में पता चला वह तक्षण ही मर गया और वहां से नाराज जी चल दिए फिर भगवान विष्णु के पास गए भगवान विष्णु ने कहा कि क्या आपका शंका समाधान हुआ तो इस पर नारद जी ने कहा कि वहां पर कोई भी व्यक्ति नहीं था सिर्फ एक बड़ा वाला कीड़ा था उस की राशि मैंने जैसे ही पूछा महिमा के विषय में तो वह मर गया चलो ठीक है कल फिर जाना वहां पर दूसरे दिन वह फिर उसी नदी के किनारे उस वृक्ष के पास जाते हैं वहां पर कोई भी मनुष्य कुछ नजर नहीं आता है लेकिन पेड़ की एक डाली पर एक सुगा बैठा हुआ था उस सुगा को देखकर नारद जी ने कहा सुज्ञ क्या तुम संत और सत्संग की महिमा के विषय में जानते हो या कुछ बता सकते हो सुबह भी वही मर गया वहां से फिर नदी नारद जी भगवान विष्णु के पास गए और अपना सारा वृत्तांत उसको कह सुनाएं भगवान विष्णु ने कहा अच्छा ठीक है कल एक किसान के दरवाजे पर एक गाय है को एक नई बछड़ा है उस बछड़ा से आप पूछ लीजिए गा वह आपको सत्संग की महिमा बता देंगे और वह सवेरे सवेरे जाता है उस किसान के यहां और जैसे ही मैं देखता है देखता है उस किसान को एक गाय को बछड़ा हुआ है उस दौर के जाता है उस बसरा को गोद में रहता है और पूछता है संत और सत्संग की महिमा के बारे में कुछ बताओ और जैसे ही उसके कान में कहता है वह बछड़ा मर जाता है और वहां से नाराज जी पीछा होकर भागता है और विष्णु भगवान के पास जाते हैं कहते हैं आप ऐसे में हमको मार खिला दीजिएगा अब सत्संग की महिमा क्या वहां तुझी से पूछते हैं वही मर जाता है ऐसा नहीं होगा कल आपका आंसर पूरा मिल जाएगा आपको एक राजा के यहां जाना है उस राजा कल पुत्र होगा और उसका तुम नामकरण भी कर देना और पूछ भी लेना और नारद जी ने ऐसा है क्या उस राजा के यहां जाता है तो पूरा मान सम्मान होता है नाराज जी उस राजा के यहां जाता है और उसके यहां जो नव शिशु पैदा लेता है उसका नामकरण करने के लिए एक शर्त रखता है कि जब मैं इसका नामकरण करूंगा एक अलग कमरा रहेगा और वहां पर कोई भी नहीं रहेगा जब इसका मैं नामकरण करके अलग हो जाऊंगा तब उसके बाद इसको कोई ले जा सकता है और यह बुआ भी वही जब नामकरण करने गया तो बच्चा से पूछता है संतोष भगवान की महिमा के बारे में अर्थात शांत और सत्संग की महिमा के बारे में उन्होंने कहा आपको तो प्रमाण मिल गया आप एक संत हैं मैं एक बड़ा वाला कीड़ा था आपके दर्शन स्पर्श से और आपके वाले सत्संग के महिमा के विषय में आप हर बार पूछ रहे थे और वही हमको आज देखिए कि मानवता में ले आया और उसके बाद नाराज जी बहुत शर्मिंदा हुए और चले गए विष्णु भगवान के पास जो भी समान पूछा तो बोला हां यही उत्तर है तुम खूबसूरत हो और जो सत्संग करते हैं तो उसका यानी कि अगर 84 के चक्कर में पड़ी है खत्म होता है और मिलता है और अंत में भक्ति करके धाम को चले जाते हैं

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