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रविवार, 19 मई 2019

एशिया का किरण पुंज भगवान बुद्ध

भगवान बुद्ध को बुद्धत्व की प्राप्ति बिहार के बोधगया में हुआ लेकिन उनका जन्म नेपाल के तराई में लुंबिनी नामक जगह पर हुआ और उसके पिताजी शुद्धोधन जो एक राजा थे और उनका पुत्र सिद्धार्थ जो बाद में भगवान बुद्ध के नाम से प्रसिद्ध हुए एक बार उसके यहां एक ज्योतिषी आया और ज्योतिषी ने कहा कि तुम्हारा बेटा या तो महान सम्राट बनेगा इतना सुना तो शुद्धोधन बहुत खुश हुए और लेकिन इसके आगे हैं ज्योतिषी ने कहा अगर राजा नहीं बना तो यह फकीर बनेगा इतना सुनते ही शुद्धोधन को बहुत अफसोस हुआ और उन्होंने अपने मन में सोचा कि मैं ऐसा व्यवस्था करूंगा जिससे कभी इसको साधु या फकीर बनने की नौबत ही नहीं आए और उसको राज के अंदर ही सभी तरह की व्यवस्था का इंतजाम कर दिया लेकिन एक दिन सिद्धार्थ ने अपने रथवान के साथ साथ चलो जाते हैं आज राज का कुछ यात्रा करते हैं और जैसे ही निकलते हैं तो देखते हैं की एक रोगी व्यक्ति जा रहा था तो उन्होंने कहा की अरे सारथी जी भाई इनको क्या हुआ है उन्होंने कहा कि यह व्यक्ति बीमार हो गया है तो सिद्धार्थ ने कहा कि क्या मनुष्य बीमार भी होता है और वह सोच में पड़ गया फिर दूसरे दिन जब जाते हैं तो एक बूढ़ा व्यक्ति को देखते हैं सिद्धार्थ ने सार्थी से पूछा कि क्या मनुष्य Buddha bhi Hota Hai मैं तो सोचा था कि मनुष्य हमेशा युवा ही रहता है और फिर वह सोच में डूब गए उसके बाद जब यह बात राजा शुद्धोधन को पता चला तो उन्होंने राज में सबको हिदायत दे दिया किस को राज से बाहर कदापि न जाने दिया जाए अगर उधर जाता है तो वहां कोई ना रहे सिर्फ युवा के अलावा वक्त को भी क्या मंजूर था एक दिन फिर घूमने के लिए अपने सारथी के साथ सिद्धार्थ निकलते हैं तो देखते हैं कि 4 आदमी एक लाश को कंधे पर ले कर के जा रहे थे तो सिद्धार्थ ने प्रश्न किया सार्थी से बताओ यह कौन जा रहा है उन्होंने कहा कि यह एक मृत व्यक्ति है जिसे श्मशान घाट ले जाया जा रहा है तो उन्होंने कहा क्या मनुष्य मरता भी है प्रभाष सोच में पड़ गया इसका दुख दूर कैसे होगा इसका उपाय कैसे होगा और सोच में काफी डूब गया और जब अपने राज दरबार में आया तो फैसला किया कि अब क्या करना पड़ेगा और राज पाठ धन-संपत्ति सब कुछ से बैरागी उत्पन्न हो गया कि जब दुनिया में मनुष्य बीमार होता है बुड्ढा होता है और मरता भी है आखिर यह जाता कहां है इसका ज्ञान जानना जरूरी है और उसके मन में बैराग उत्पन्न हो गया और उन्होंने निश्चय किया इसका कारण को जानेंगे और यह दुख को दूर करेंगे और उसके बाद वह अपना प्लान बनाया और एक रात्रि को अपना प्यारे बेटे राहुल और पत्नी को छोड़ कर के आधी रात को ईश्वर की खोज में निकल पड़े स्वयं की खोज में निकल पड़े और वह नेपाल के तराई से आते आते बिहार के गया में ध्यान अस्त हो गए और ध्यान करते करते भी जा उसको सफलता नहीं मिला तो निराशा हाथ लगा सोचा अब क्या करूं संयोग की बात है सोचते-सोचते सो गए तो सपने में देखते हैं कि वीना लेकर आए हैं इनकी सभा में उड़ जा रहे हैं तो बिना में तीन ताल है दोनों बगल का तान पर अगर वीना को बजाया जा रहा था तो सुनने में अच्छा नहीं लगता था जब मध्यम स्तर पर भी ना बजाया जाता था तो आवाज बहुत मधुर सुनने में आया और उन्होंने था ना कि हमको जो है बाहरी अगल-बगल का सोच छोड़ कर के मध्यम मार्ग को अपनाना होगा तब जाकर के हमें सफलता मिलेगी और उन्होंने ऐसा ही किया दोनों धार को एक किया और सुषमा में लगाया फिर क्या था उनकी दृष्टि एक हो गई और दिव्य दृष्टि मिल गई और अंधकार मिट गया और उसके जीवन में प्रकाश ही प्रकाश हो गया और वह सिद्धार्थ से बुद्ध हो गए वहीं आगे चलकर भगवान बुद्ध हुए और उन्होंने सिद्ध करके दिखा दिया अगर मनुष्य थाने ले तो हर कार्य को पूरा कर सकता है और मनुष्यता का एक लक्ष्य होता है किसी भी दृष्टि योग से अंधकार मंडल को पार करना और उन्होंने करके दिखा दिया और स्वयं मनुष्य रहते हुए भगवान बन गए भगवान बुद्ध बन गए और आज वह अपने अंदर जो प्रकाश किया अपना तो सुख पाया ही दुनिया को जगाया ही आज वह एशिया का किरण पुंज बन गया और जो अपने अंदर साधना करके अगर प्रकाश को पा लेते हैं तो वह भी भगवान बुद्ध के समान हो सकते हैं सिर्फ है अपने अंदर दृष्टि को पाने का और यह लक्ष उसी को प्राप्त होगा जो दृढ़ निश्चय होगा और यह संकल्प भगवान बुद्ध के प्रेरणा से लेकर करें तो जरूर पूरा होगा जब एक साधारण मानव भगवान बुद्ध बन सकते हैं एशिया का किरण पुंज बन सकते हैं तो सभी मानव भी बन सकते हैं व शर्तें साधना करना पड़ेगा

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